राजेन्द्र जोशी
देहरादून । मुख्यमंत्री निशंक की ताजपोशी के बाद विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भी नवोदित राज्य उत्तराखण्ड आज तक राज्य ने विकास के कई नये आयाम तो छुये ही हैं साथ ही प्रदेश ने संस्कृति व सास्ंकृतिक क्षेत्र में नये सोपानों को जोड़ा है। वहीं इस बीते साल में मुख्यमंत्री निशक को कई आरोपों में भी लपेटा गया, जिसमें उनकी कहीं भी सहभागिता नहीं पायी गयी, वहीं उच्चन्यायालय ने भी इस बात को माना कि सरकार में शामिल अधिकारियों ने सरकार को गुमराह कर सरकार से गलत कार्या करवाये।जबकि मुख्यमंत्री ने इन मामलों के संज्ञान में आते ही इन्हे तुरन्त निरस्त तक कर दिया। मसलन जलविद्युत परियोजनाओं के आंवंटन का मामला हो अथवा ऋषिकेश के चर्चित स्टर्डिया फैक्ट्री का मामला दोनों ही मामलो ंमें हो हल्ला मचाने वाली कांग्रेस को तो मंुह की खानी ही पड़ी वहीं पार्टी में ही उनके विरोधियों को न्यायालय के निर्णय ने चित्त कर डाला। कुल मिलाकर बीता वर्ष 2010 निशंक की विकास गाथा लिख गया। पृथक उत्तराखण्ड राज्य गठन के समय सेे अब तक प्रदेश ने अवस्थापना एवं सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवोदित राज्यों में तो उत्तराखण्ड शीर्षस्थ है ही, राष्ट्रीय स्तर के विकास सूचकांक में भी उत्तराखण्ड कई क्षेत्रों में अग्रणी बताया गया है 10 साल के इस नवोदित राज्य ने अपने 65 प्रतिशत वन और दुरूह भौगोलिकता के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास दर में देश में तीसरा शीर्षस्थ राज्य होने का गौरव भी इसी साल हासिल किया है। प्रदेश की विकास दर राज्य बनने के समय 2.9 प्रतिशत थी। विकास दर में 3 गुना से अधिक वृद्धि करते हुए प्रदेश ने 9.5 प्रतिशत वृद्धि दर भी निशंक शासन काल में हासिल की है। वहीं आम आदमी का जीवन स्तर ऊंचा उठाने और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से संचालित करने के फलस्वरूप राज्य ने बीस सूत्री कार्यक्रम में देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। पर्यटन में देश में अव्वल रहते हुए राज्य को केन्द्रीय योजना आयोग के अध्ययन के अनुसार घरेलू पर्यटकों की संख्या की दृष्टि से हिमालयी राज्यों में उत्तराखण्ड प्रथम स्थान पर तथा देश के समस्त राज्यों में सातवें स्थान पर रखा है। उत्तराखण्ड पूरे देश व दुनिया को प्राण वायु देता है साथ ही प्रदेश का 64 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए हैं, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर योजना आयोग द्वारा भी सराहा गया है और योजना आयोग द्वारा अपने सर्वेक्षण में देश में बेहतर पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान पर रखा गया है। वहीं 108 सेवा को राज्य महिला आयोग, पुलिस सहायता और वन विभाग से जोड़ा गया। केन्द्रीय योजना आयोग के प्रतिवेदन के अनुसार बैंकिंग सुविधा देने में राज्य में प्रति लाख जनसंख्या पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शाखाओं का औसत 7.71 का है जो राष्ट्रीय औसत 4.51 की तुलना में काफी अधिक है। ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में 96 प्रतिशत से अधिक ग्राम विद्युतीकृत किये जा चुके हैं, जो राष्ट्रीय औसत 82 प्रतिशत से बहुत अधिक है। राज्य सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रभावी पहल की है। सरकार के इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है। रजिस्ट्रार जनरल, भारत सरकार द्वारा 2009 में कराये गये सर्वेक्षण के अनुसार उत्तराखण्ड में जन्मदर 20.1 प्रति हजार है, जो राष्ट्रीय औसत 22.8 से कम है। इसी प्रकार मृत्युदर 6.4 प्रति हजार है, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 से कम है। शिशु मृत्युदर 44 प्रति हजार है, जो कि राष्ट्रीय औसत 53 प्रति हजार की तुलना में काफी कम है। जहां एक ओर आज भी देश के कई प्रदेश बिजली की मार झेल रहे हैं वहीं उत्तराखण्ड ने बिजली की मांग के सापेक्ष आपूर्ति के लिए 7841 मिलियन यूनिट लक्ष्य के सापेक्ष 7765 मिलियन यूनिट की उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे देश में राज्य ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।इतना ही नहीं गांव-गांव तक बिजली पहंुचाने के राज्य सरकार के संकल्प के तहत निर्धारित 47 गांव के लक्ष्य के सापेक्ष प्रदेश ने 65 गांव का विद्युतीकरण कर 138 प्रतिशत कार्य करते हुए पूरे देश में राज्य नें दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं राज्य सरकार ने वित्तीय नियोजन का परिचय देते हुए केन्द्रीय योजना आयोग से उत्तराखण्ड राज्य के लिए लगातार बढ़ी हुई वार्षिक योजना स्वीकृत कराने में सफलता प्राप्त की है। जहां वर्ष 2001-02 में योजना का आकार रूपये 1050 करोड़ था। वहीं वित्तीय वर्ष 2010-11 में बढ़कर रूपये 6800 करोड़ हो गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य को 360 करोड़ रूपये की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता भी मिली है। प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबन्धन से प्रभावित होकर 13वें वित्त आयोग से वर्ष 2010 में 1000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रोत्साहन के रूप में मंजूर की गई है। राज्य गठन के समय लगभग 15 हजार रूपये प्रति व्यक्ति वार्षिक आय थी, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग 42 हजार रूपये प्रति व्यक्ति हो गई है। राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए आय के साधन बढ़ाए हैं। ऐसी विकासपरक योजनाएं शुरु की हैं, जिनसे रोजगार के अधिक अवसर मिल सके। इससे साबित होता है कि प्रदेश सरकार रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेशवासियों की आमदनी में वृद्धि करने में सफल रही है। अपनी आय बढाने में भी राज्य के गठन बाद इन दस वर्षों में अपने राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि की है। राज्य गठन के समय जहां राजस्व प्राप्ति लगभग 200 करोड़ रूपये थी, वह आज बढ़कर 13342.45 करोड़ रूपये हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, मुख्य जिला मार्ग, ग्रामीण मोटर मार्ग, ग्रामीण हल्का वाहन मार्ग सहित वर्ष 2001-02 में कुल 982 किलोमीटर सडकें निर्मित थी। दस वर्षों में 21886 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया। सड़कों के लिए वर्ष 2001-02 में 170.16 करोड़ रूपये धनराशि का बजट स्वीकृत था, जबकि वर्ष 2010-11 तक 442.76 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है। एक जानकारी के अनुसार वर्ष 2001-02 में कुल 84 पुल थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 742 हो गई है। अब तक सड़कों के निर्माण पर 5873.86 करोड़ रूपये धनराशि व्यय की गई है। उत्तराखण्ड में प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियां, सगंध पादप, फलदार वृक्ष हैं। जिनके बेहतर दोहन से बेमौसमी सब्जी, फल, फूल आदि क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि की गई है। जड़ी-बूटी की खेती के लिए इसकी लागत मूल्य का 50 प्रतिशत, अधिकतम एक लाख रूपये भौगोलिक जलवायु व जैविक विविधता वाले इस हिमालयी राज्य में विभिन्न फल, सब्जी, पुष्प व मसाला फसलों की और भी संभावनाएं तलाशी जा रही है। इतना ही नहीं जड़ी-बूटी को आमदनी का मजबूत जरिया बनाने के लिए ‘बागवानी विकास परिषद’ का गठन तक किया गया है राज्य सरकार ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने जहंा वर्ष 2001-02 में 997 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन बढ़कर वर्ष 2010-11 में 3100 मेगावाट कर दिया है। वहीं 35 सालों से लम्बित बहुउद्देशीय जमरानी बांध परियोजना ,लखवाड़-व्यासी जल विद्युत परियोजना पर भी कार्य शुरू किया जा चुका है। जबकि हिमाचल प्रदेश के सहयोग से किशाऊ बांध परियोजना के लिए प्रभावी पहल की गयी है। राज्य गठन के समय जहां 12563 (79ः) गांवों में बिजली थी, वहीं वर्ष 2010-11 में यह बढ़कर 15545 (98.6ः) गांवों तक पहुंच गई है। इसी तरह 16667 ऊर्जीकृत टयूबवेल/पम्पसेट अब वर्ष 2010-11 में बढ़कर 22277 हो गये हैं। लाइन लॉस में भी उल्लेखनीय कमी आई है। यह पूर्व में 53 प्रतिशत से घटकर अब 29 प्रतिशत रह गई है। राज्य गठन के समय 7240 ग्रामीण पेयजल योजनाएं, 112 नलकूप, 10282 हैण्डपम्प, 63 नगरीय पेयजल तथा 44 पम्पिंग योजनाएं थी। इन दस वर्षों में 1547 ग्रामीण पेयजल योजनाओं का कार्य पूर्ण तथा 23 ग्रामीण पेयजल योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार 307 नलकूप, 104 मिनी नलकूप का निर्माण तथा अभावग्रस्त क्षेत्र में 10694 हैण्डपम्प स्थापित किये गए।पेयजल योजनाओं के लिए तब 96.57 करोड़ रूपये की धनराशि थी, जो वर्ष 2010-11 में बढ़कर 421.58 करोड़ रूपये हो गई है। राज्य गठन के समय औद्योगिक प्रगति दर 1.9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 26 प्रतिशत हो गयी है। राज्य गठन के समय पंूजी निवेश 95 करोड़ रूपये था, जो अब बढ़कर 26,000 करोड़ रूपये पूंजी निवेश किया है । पंतनगर, हरिद्वार, सितारगंज एवं सेलार्कुइं में कई औद्योगिक आस्थान स्थापित किये गये हैं। राज्य गठन के समय 4202 लोगों को रोजगार के अवसर। इन दस वर्षों में लगभग 91443 लोगो को रोजगार के अवसर मिले हैं। उत्तराखण्ड राज्य में इन दस वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती की गई है। जीवनदायिनी 108 आपात सेवा शुरू हुई है। श्रीनगर बेस चिकित्सालय को मेडिकल कालेज बनाया गया है। हल्द्वानी फॉरेस्ट ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज का राजकीकरण कर दिया गया है। अल्मोड़ा तथा देहरादून में भी मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं। राज्य गठन के समय 1525 उपकेन्द्र, 23 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 235 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र थे। अब बढ़कर 1847 उपकेन्द्र, 55 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 255 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हो गये है। प्रदेश का पहला बी.एससी. नर्सिंग कालेज भी देहरादून में शुरू हो गया है। पौड़ी, अल्मोड़ा, टिहरी तथा पिथौरागढ़ में भी नर्सिंंग कालेज की स्थापना की कार्यवाही चल रही है। उत्तराखण्ड का 64 प्रतिशत भू भाग वनाच्छादित है। इनमें विभिन्न राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्य जीव विहार हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में सघन वृक्षारोपण करकेे हरित आवरण में वृद्धि की गई है। वृक्षारोपण में औषधीय व सगंध पादपों पर भी जोर दिया गया है। नक्षत्र व बद्रीश वन वाटिका की प्रभावी पहल की गई है। राज्य गठन के समय 6839 वन पंचायतें गठित थी, जो आज बढ़कर 12079 हो गई हैं। वर्ष 2000-01 में राष्ट्रीय पार्कों एवं वन्य जीव विहार में लगभग 67776 की तुलना में 2008-09 में लगभग 2 लाख 92 हजार 990 व्यक्ति भ्रमण के लिए आये हैं, जिनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से कैम्पा योजना के अन्तर्गत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए 830 करोड़ रुपये स्वीकृत। वहीं बाघों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा बाघ संरक्षण का कार्यक्रम शुरु किया गया, जिसके लिए देश के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी महेन्द्र सिंह धोनी को ब्रांड एम्बेसडर नामित किया गया। राज्य सरकार ने हवाई सेवा से जोड़ा पर्यटन स्थलों को। हैली टूरिज्म को प्रोत्साहित किया गया। राज्य गठन के समय पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं के लिए मात्र 34.76 करोड रूपये धनराशि की व्यवस्था थी। वर्ष 2010-11 में यह धनराशि बढ़कर 111.23 करोड़ रूपये हो गई है। राज्य बनने पर जहां देशी पर्यटकों की संख्या एक करोड़ 05 लाख थी, वहीं यह संख्या बढ़कर अब तक 2 करोड़ 31 लाख हो गई है। राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में शुरू की गई वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में तब मात्र 62 उद्यमियों को लाभान्वित किया गया था, जिनकी संख्या अब बढ़कर 3147 हो गई है।वर्ष 2001-02 में जहां विदेशी पर्यटकों की संख्या 55 हजार थी, वहीं यह संख्या बढ़कर अब तक एक लाख़ 18 हजार हो गई है। पहली बार लगभग 21 हजार नौकरियों के द्वार वर्ष 2010 में स्थानीय बेरोजगारों के लिए खोले गये हैं, जिनमें 12 हजार समूह ‘ग’, 4 हजार शिक्षक तथा 490 विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशक के पद शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से आने वाले 4 हजार पुलिस कर्मियों के स्थान पर स्थानीय चार हजार नौजवानों की भर्ती की जायेगी। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाखों की संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार-स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों में होने वाली समूह ‘ग’ की भर्ती के लिए अब राज्य के सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण अनिवार्य। समूह ‘ग’ के कई पद लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर। चयन प्रक्रिया में मुख्यतः उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक परिवेश से सम्बन्धित जानकारी की अनिवार्य की गयी है।हालांकि समूह ग की परीक्षा में गढवाली, कुमायूंनी तथा जौनसारी बोलियों के ज्ञान को हटाने से सरकार का विरोघ भी हुआ है। राज्य गठन के समय 2104 नहरें निर्मित थी, जो इन दस वर्षों में बढ़कर 2490 हो गई हैं। राज्य गठन से अब तब लघु सिंचाई में 12537.22 किलोमीटर सिंचाई गूल, 8909 सिंचाई हौज, 510 हाईड्रम निर्मित करते हुए जिससे 1,23,368 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है। वर्ष 2010 में प्रारम्भ इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के सभी राजकीय कर्मचारियों तथा अवकाश प्राप्त कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा निजी क्षेत्र की सहभागिता से क्रियान्वित की जायेगी। चयनित संस्था द्वारा राज्य के अन्दर एवं अन्य राज्यों में सरकारी/गैर सरकारी चिकित्सालयों को चिन्हित किया जायेगा, जिनमें राज्य कर्मचारी स्मार्ट कार्ड के माध्यम से चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकंेगे। सरकारी भर्तियों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए कारगर कदम उठाये गये हैं। पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है। समूह ‘ग’ के पदों में साक्षात्कार की व्यवस्था को समाप्त किया गया है। अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में उत्तर शीट की कार्बन प्रति परीक्षा के पश्चात अपने साथ ले जाने की अनुमति भी दी गई है। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए परीक्षा परिणाम को वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है, ताकि परीक्षार्थी कार्बन कॉपी से अपने अंको का मिलान कर सकंे। कृषि योजनाओं का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिये ‘कृषक महोत्सव’ शुरू किया गया है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए खाद, बीज, कृषि उपकरण आदि के क्रय पर 50 से 90 प्रतिशत छूट की योजनाएं चलाई गयी हैं। गांव-गांव कृषक रथ के जरिये किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। गांवों के समग्र विकास को प्रतिबद्ध राज्य सरकार ने इस दिशा में नायाब पहल करते हुए यह अभिनव ‘अटल आदर्श ग्राम योजना’ शुरू की है। यह योजना राज्य स्थापना दिवस 9 नवम्बर, 2009 से शुरू की गई। इसके लिए 670 न्याय पंचायत मुख्यालय के ग्रामों को प्रथम चरण में चुना गया है। इस योजना में 16 विभागों को शामिल किया गया है और प्रत्येक विभाग को निर्धारित लक्ष्य दिये गये हैं। इन सभी विभागों के द्वारा ग्राम स्तर पर समस्त अवस्थापना सुविधाएं, मसलन बिजली, पानी, चिकित्सा स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी। जिन्हें इस वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जायेगा। उत्तराखण्ड में महिलाओं की अहम भूमिका है। राज्य आन्दोलन में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभायी। राज्य सरकार ने पहली बार महिलाओं को सम्मान देते हुए पंचायत स्तर पर उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की है। समाज की बालिकाओं की स्थिति में समानता लाने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन हेतु बी.पी.एल. परिवारों को जन्म के उपरान्त बालिका के पक्ष में 5000 रुपये की धनराशि जमा करने की व्यवस्था की गयी है। सरकार ने बी.पी.एल. परिवार की इंटरमीडिएट उत्तीर्ण बालिकाओं को 25 हजार रुपये की एफ.डी. देने का निर्णय लिया गया है। इससे बालिकाओं को उच्च शिक्षा में मदद मिलेगी। उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जिसनें अपने पूर्व सैनिकों का अभूतपूर्व सम्मान दिया है। उत्तराखण्ड देश का ऐसा विशिष्ट राज्य है, जहां लगभग प्रत्येक परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना में है। सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों तथा उनके परिजनों को पूर्ण सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से अनूठी पहल शुरू की गई है। ‘जय जवान आवास योजना’ भी शुरू। इसके तहत बनने वाले आवास के लिए निःशुल्क भूमि देने का निर्णय लिया गया है, जो देश में एक अनूठी पहल है। पर्यावरण संरक्षण में भूतपूर्व सैनिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने एवं उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिये राज्य में चार इको टॉस्क फोर्स का गठन किया गया। कुल मिलाकर 2010 निशंक सरकार के लिए कई खट्टे मीठे अनुभव दे गया, साथ ही उन्हे यह शिक्षा भी दे गया कि जो भी कार्य वे करें अपनी दिल दिमाग से करें और अपने विश्वसनीय लोगों की राय पर न कि पार्टी व अपने इर्द गिर्द घूम रहे उन चाटुकारों के कहने पर जो केवल कुर्सी पर रहते हुए ही उनके साथ दिखायी दे रहे हैं।