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भाजपा की नाव निशंक के बढ़ते जनाधार से परेशान हैं मुख्यमंत्री पद के दावेदार

on अप्रैल 28, 2011

अपने ही डुबोने पर लगे हैं भाजपा की नाव

निशंक के बढ़ते जनाधार से परेशान हैं मुख्यमंत्री पद के दावेदार

राजेन्द्र जोशी

देहरादून, 28 अप्रैल। भारतीय जनता पार्टी मिशन 2012 को लेकर लगातार अपना अभियान चलाए हुए है। मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक के ताबडतोड़ दौरों ने भाजपा के जनाधार में जहां अप्रत्याशित वृद्धि कर दी है वहीं भाजपा के ही कुछ नेता हैं कि वे अपनी ही पार्टी के किए धरे पर पलीता लगाने पर लगे हैं। उल्लेखनीय है कि मेजर जनरल भुवन चंद खण्डूडी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाए जाने के बाद भाजपा के खिलाफ जनाक्रोश का परिणाम पांचों लोकसभा सीट पर पार्टी को मिली करारी शिकस्त के रूप में प्रदेश की जनता दे चुकी थी और प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल भाजपा आलाकमान भी भांप चुका था। यही कारण है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से खण्डूडी को हटाया गया और ताजपोशी की गई एक युवा नेता निशंक की। कुछ दिन तो भाजपा के वे नेता मुख्यमंत्री के सुर में सुर मिलाते रहे लेकिन बाद में इन नेताओं को लगने लगा कि यदि निशंक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपनी पकड़ मजबूत कर दिए तो इनका राजनैतिक भविष्य चौपट हो जाएगा। सो ये नेता अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री की कुर्सी के पायों को खींचने पर लग गए। इन्हें निशंक के हर कार्य बुरे लगने लगे और विपक्ष तो कम भाजपा के ये नेता निशंक के खिलाफ प्रदेश से लेकर केंद्र तक माहौल बनाने में जुट गए। लेकिन निशंक के कार्याें ने केंद्रीय आलाकमान को जहां संतुष्ट किया वहीं निशंक के कार्यों से प्रदेश की जनता में भी भाजपा के पक्ष में कम होता जनाधार भी बढ़ता गया। आज स्थिति खण्डूडी के शासनकाल से उलट है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के ताबडतोड़ दौरों ने भाजपा के जनाधार में अप्रत्याशित वृद्धि की हैै। यह वृद्धि अचानक ऐसे ही नहीं हुई इसके पीछे डा. निशंक की कुशल कार्य क्षमता और जनता में उनकी पैठ प्रमुख रही है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि डा. निशंक ने 20 फरवरी के बाद प्रदेश में भाजपा के पक्ष में वह माहौल खडा कर दिया है जो कोई नेता नहीं कर सकता। प्रदेश का मुखिया राज्य बनने के बाद ऐसे-ऐसे दूर-दराज के गांवों तक पहुंचा जहां वर्तमान उत्तराखण्ड के नेता तो क्या आजादी के बाद से बने उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश के नेता तक नहीं पहुंचे थे। मुख्यमंत्री निशंक ने इन दूर-दराज के गांवों के लोगों की सुध ही नहीं ली बल्कि उनकी समस्याओं को आत्मसात भी किया और दौरे से लौटने के बाद देहरादून पहुंचने पर ग्रामीणों द्वारा दिए गए पत्रों पर शासन को तुरंत कार्यवाही के निर्देश भी दिए। इससे ग्रामीणों में भाजपा सरकार के प्रति अपनापन तो पैदा हुआ ही साथ ही ग्रामीणों को यह लगने लगा है कि भाजपा सरकार उनकी खैरख्वाह है। प्रदेश के वर्तमान राजनैतिक वातावरण को यदि देखा जाए तो भाजपा के ही नेता अपनी ही सरकार के कार्यों से संतुष्ट नहीं है और वे मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसा माहौल खड़ा करने की कोशिश में लगे हुए हैं जिससे पार्टी को खासी हानि उठानी पड़ सकती है। विपक्ष तो सत्ता के कार्याें को कभी भी जायत नहीं ठहराता यहां तो सत्ता पक्ष ही विपक्ष बना हुआ है।

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